इस्लामाबाद: आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोपों से घिरा पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज स्थिति में नजर आया है। इस बार खुलासा किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने किया है। उनके बयान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना की वास्तविक हालत को सामने ला दिया है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जरदारी ने स्वीकार किया कि तनाव के हालात में पाकिस्तानी सेना बंकरों में छिपी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें स्वयं भी सुरक्षा कारणों से बंकर में रहने की सलाह दी गई थी। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान लगातार अपनी सैन्य ताकत का दावा करता रहा है।
जानकारों का कहना है कि जरदारी का यह बयान पाकिस्तान की अंदरूनी कमजोरी को उजागर करता है। देश इस समय गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और भारी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक सैन्य तनाव झेलने की क्षमता पाकिस्तान के पास नहीं है। सेना का बंकरों में सिमटना इस असुरक्षा और दबाव की तस्वीर पेश करता है।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। इस कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। कुल 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और प्रशिक्षण केंद्र शामिल थे। इन्हीं ठिकानों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिशें रची जा रही थीं।
22 अप्रैल का दिन आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। घटना को तीन महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द और देशभर में आक्रोश अब भी कायम है। हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने उसी दिन ली थी और उससे जुड़ी एक तस्वीर भी साझा की थी।
